Contempt of court part 1 न्यायालय की अवमानना भारतीय न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। इसका मुख्य उद्देश्य न्यायालय की गरिमा, प्रतिष्ठा और अधिकार को बनाए रखना तथा न्यायिक कार्यवाही में बाधा उत्पन्न होने से रोकना है। भारत में न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 के अंतर्गत अवमानना को मुख्यतः दो भागों में बाँटा गया है—सिविल अवमानना और आपराधिक अवमानना। सिविल अवमानना में न्यायालय के न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court), निर्णय, निर्देश या वचनबद्धता का जानबूझकर पालन न करना शामिल है। वहीं, आपराधिक अवमानना में न्यायालय की प्रतिष्ठा को कम करना, न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालना अथवा न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करना शामिल हो सकता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय तथा अनुच्छेद 215 उच्च न्यायालय को अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति प्रदान करता है। हालाँकि, न्यायालय की निष्पक्ष आलोचना और स्वस्थ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का आवश्यक हिस्सा हैं।