BNSS FROM SECTION 481 TO 490
From section 481 to 490 धारा 481 – अगले अपीलीय न्यायालय में उपस्थित होने हेतु जमानत यदि अभियुक्त दोषमुक्त (Acquitted) हो जाता है या उसे कम सजा मिलती है, तो न्यायालय उससे एक बांड ले सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि राज्य अपील करे तो अभियुक्त अपीलीय न्यायालय में उपस्थित हो। Datta Keshav Karale v. State of Maharashtra सिद्धांत (Principle): सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धारा 437A CrPC (अब BNSS धारा 481) का उद्देश्य केवल अभियुक्त की भविष्य में उपस्थिति सुनिश्चित करना है। इस धारा के तहत अत्यधिक कठोर या अव्यावहारिक जमानती शर्तें नहीं लगाई जानी चाहिए। यदि अभियुक्त पहले से मुकदमे में सहयोग करता रहा है, तो न्यायालय को यथार्थवादी शर्तें लगानी धारा 482 – अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) यदि किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी की आशंका हो, तो वह उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय से अग्रिम जमानत मांग सकता है। न्यायालय शर्तों सहित अग्रिम जमानत दे सकता है। Gurbaksh Singh Sibbia v. State of Punjab (1980) ⭐⭐⭐⭐⭐ सिद्धांत: अग्रिम जमानत (Anticipatory Ba...