Section 4 5 5bsa
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धारा 4, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023)
विषय (Heading)
"एक ही लेन-देन (Same Transaction) का हिस्सा बनने वाले तथ्यों की प्रासंगिकता"।
यह धारा पुराने Indian Evidence Act, 1872 की Section 6 (Res Gestae) के समान है।
धारा 4 का प्रावधान
यदि कोई तथ्य स्वयं विवादित तथ्य (Fact in Issue) नहीं है, लेकिन वह उस विवादित तथ्य से इतना निकटता से जुड़ा हुआ है कि वह उसी लेन-देन (Same Transaction) का हिस्सा बन जाता है, तो वह तथ्य भी प्रासंगिक (Relevant) होगा, चाहे वह अलग समय या अलग स्थान पर घटित हुआ हो।
सरल भाषा में
कोर्ट केवल अपराध या घटना को नहीं देखती, बल्कि उस घटना से जुड़े ऐसे सभी तथ्यों को भी देखती है जो उसी घटना का हिस्सा हों।
उदाहरण के लिए, यदि हत्या के समय किसी गवाह ने चिल्लाकर कहा—"राम ने श्याम को मार दिया!"—तो यह कथन भी साक्ष्य के रूप में प्रासंगिक हो सकता है क्योंकि यह उसी घटना का हिस्सा है।
उदाहरण
उदाहरण 1: हत्या का मामला
A ने B पर चाकू से हमला किया।
हमले के समय B चिल्लाया—
"A मुझे मार रहा है!"
यह कथन सुनने वाले गवाह अदालत में इसे बता सकते हैं क्योंकि यह घटना के साथ तत्काल जुड़ा हुआ है और उसी transaction का हिस्सा है।
उदाहरण 2: सड़क दुर्घटना
एक ट्रक ने मोटरसाइकिल को टक्कर मारी।
दुर्घटना के तुरंत बाद उपस्थित व्यक्ति चिल्लाया—
"ट्रक बहुत तेज गति से आ रहा था!"
यह कथन भी धारा 4 के अंतर्गत प्रासंगिक हो सकता है।
Landmark Judgment
Ratten v. The Queen
सिद्धांत: Res Gestae
तथ्य:
हत्या से ठीक पहले मृतका ने फोन पर सहायता मांगी थी।
निर्णय:
अदालत ने कहा कि घटना के साथ तत्काल और अभिन्न रूप से जुड़े कथन स्वीकार्य हैं।
महत्त्व:
इस निर्णय ने Res Gestae के सिद्धांत को स्पष्ट किया, जो भारत में भी Section 6 IEA और अब Section 4 BSA के अंतर्गत लागू होता है।
Sukhar v. State of Uttar Pradesh
निर्णय:
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि घटना के साथ तुरंत जुड़े कथन Section 6 Evidence Act (अब Section 4 BSA) के अंतर्गत स्वीकार्य हैं।
Indian Evidence Act, 1872 से तुलना
| Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 | Indian Evidence Act, 1872 |
|---|---|
| Section 4 | Section 6 |
| Relevancy of facts forming part of same transaction | Facts forming part of the same transaction |
| सिद्धांत: Res Gestae | सिद्धांत: Res Gestae |
दोनों धाराओं का मूल सिद्धांत लगभग समान है; केवल धारा संख्या बदली गई है।
Conclusion
धारा 4 BSA (पूर्व Section 6 IEA) "Res Gestae" के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार एक ही लेन-देन का हिस्सा बनने वाले तथ्य प्रासंगिक होते हैं।
Section 5, Bharatiya Sakshya Adhiniyam (BSA), 2023
(Corresponding to Section 7, Indian Evidence Act, 1872)
English Text
Section 5 – Facts which are occasion, cause or effect of facts in issue or relevant facts
Facts which are the occasion, cause or effect (immediate or otherwise) of facts in issue or relevant facts, or facts which constitute the state of things under which they happened, or which afforded an opportunity for their occurrence, are relevant.
हिंदी में अर्थ
यदि कोई तथ्य किसी विवादित तथ्य (Fact in Issue) या संगत तथ्य (Relevant Fact) का—
कारण (Cause),
अवसर (Occasion),
परिणाम (Effect),
घटना के समय की परिस्थिति (State of Things), या
घटना होने का अवसर (Opportunity)
प्रदान करता है, तो वह तथ्य न्यायालय में संगत (Relevant) माना जाएगा।
सरल उदाहरण
1. Robbery Case (डकैती)
प्रश्न: क्या A ने B को लूटा?
तथ्य:
लूट से कुछ समय पहले B मेले में गया था।
B के पास बहुत पैसे थे।
B ने कई लोगों को बताया था कि उसके पास पैसे हैं।
ये तथ्य यह दिखाते हैं कि अपराध का अवसर कैसे बना, इसलिए ये प्रासंगिक (Relevant) हैं।
2. Murder Case (हत्या)
प्रश्न: क्या A ने B की हत्या की?
तथ्य:
घटनास्थल के पास संघर्ष (struggle) के निशान मिले।
जमीन पर घसीटने के चिन्ह पाए गए।
ये हत्या के प्रभाव (effect) और परिस्थितियों को दर्शाते हैं, इसलिए Relevant हैं।
3. Poisoning Case (जहर देना)
प्रश्न: क्या A ने B को जहर दिया?
तथ्य:
B की स्वास्थ्य स्थिति क्या थी?
A को B की खान-पान की आदतों की जानकारी थी।
A को जहर देने का अवसर मिला था।
ये तथ्य अपराध के कारण और अवसर को सिद्ध करते हैं, इसलिए Relevant हैं।
Landmark Judgment
R v. Richardson
इस प्रसिद्ध अंग्रेजी मामले में न्यायालय ने कहा कि ऐसे तथ्य जो अपराध के कारण, परिणाम या उससे जुड़ी परिस्थितियों को स्पष्ट करते हैं, उन्हें साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। यह सिद्धांत बाद में भारतीय साक्ष्य कानून के Section 7 IEA तथा वर्तमान Section 5 BSA का आधार बना।
भारतीय निर्णय
Ram Bihari Yadav v. State of Bihar
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि घटनास्थल पर मिले रक्त के धब्बे, संघर्ष के निशान तथा अन्य परिस्थितिजन्य तथ्य अपराध की घटना से जुड़े प्रभाव (effects) हैं और प्रासंगिक साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जा सकते हैं।
Comparison: BSA Section 5 vs IEA Section 7
| Basis | BSA, 2023 (Section 5) | IEA, 1872 (Section 7) |
|---|---|---|
| Subject | Occasion, Cause, Effect, Opportunity | Occasion, Cause, Effect, Opportunity |
| Scope | लगभग समान | लगभग समान |
| Language | आधुनिक एवं सरल | पुरानी भाषा |
| Principle | No substantial change | Original provision |
Exam Point
Section 5 BSA = Old Section 7 IEA
दोनों का मूल सिद्धांत एक ही है कि Cause + Occasion + Effect + Opportunity + Surrounding Circumstances से जुड़े तथ्य न्यायालय में Relevant होते हैं।
One-Line Memory Trick
"COEOS" = Cause + Occasion + Effect + Opportunity + State of Things = Relevant under Section 5 BSA.
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