BNSS SECTION 511 TO 519 BNSS
- Get link
- X
- Other Apps
SECTION 511 to 519
धारा 511 – त्रुटि, चूक या अनियमितता के कारण निर्णय या दंड कब पलटा जाएगा
यदि शिकायत, समन, वारंट, आरोप, निर्णय या कार्यवाही में कोई त्रुटि, चूक या अनियमितता हो, तो केवल उसी आधार पर निर्णय निरस्त नहीं किया जाएगा, जब तक कि उससे न्याय में वास्तविक विफलता (Failure of Justice) न हुई हो।
धारा 512 – कुर्की में त्रुटि से कुर्की अवैध नहीं होगी
यदि कुर्की (Attachment) की कार्यवाही में कोई तकनीकी त्रुटि हो, तो केवल उसी कारण से कुर्की अवैध नहीं मानी जाएगी।
अध्याय XXXVIII – कुछ अपराधों के संज्ञान की समय-सीमा (Limitation)
धारा 513 – परिभाषाएँ
इस अध्याय में प्रयुक्त शब्दों, विशेषकर "परिसीमा अवधि (Period of Limitation)" का अर्थ स्पष्ट किया गया है।
धारा 514 – समय-सीमा समाप्त होने के बाद संज्ञान पर रोक
निर्धारित परिसीमा अवधि समाप्त हो जाने के बाद न्यायालय सामान्यतः अपराध का संज्ञान नहीं लेगा।
धारा 515 – परिसीमा अवधि कब से शुरू होगी
परिसीमा अवधि सामान्यतः निम्न में से किसी तिथि से शुरू होगी—
अपराध की तिथि से,
अपराध का पता चलने की तिथि से,
अपराधी की पहचान होने की तिथि से।
धारा 516 – कुछ मामलों में समय की गणना से अपवर्जन
कुछ परिस्थितियों में समय की गणना नहीं की जाएगी, जैसे—
अभियोजन चलाने की अनुमति (Sanction) प्राप्त करने में लगा समय,
अन्य न्यायालय में सद्भावना से कार्यवाही चलाने में लगा समय,
अभियुक्त के विदेश में रहने या फरार रहने की अवधि।
धारा 517 – न्यायालय बंद होने का दिन
यदि परिसीमा अवधि ऐसे दिन समाप्त होती है जब न्यायालय बंद हो, तो न्यायालय के पुनः खुलने वाले पहले दिन संज्ञान लिया जा सकता है।
धारा 518 – सतत (Continuing) अपराध
यदि अपराध लगातार जारी रहता है, तो अपराध जारी रहने के प्रत्येक क्षण से नई परिसीमा अवधि प्रारम्भ होती है। उदाहरण: न्यायालय के आदेश का लगातार उल्लंघन।
धारा 519 – कुछ मामलों में परिसीमा अवधि का विस्तार
यदि न्यायालय को यह संतोष हो कि—
विलंब का उचित कारण था, या
न्याय के हित में ऐसा करना आवश्यक है,
तो वह परिसीमा अवधि समाप्त होने के बाद भी अपराध का संज्ञान ले सकता है।
goog_1976203737
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment