BNSS section 501 to 510 BNSS
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धारा 501 – मानहानिकारक एवं अन्य आपत्तिजनक सामग्री का नष्ट किया जाना
यदि किसी व्यक्ति को संबंधित अपराध में दोषी ठहराया जाता है, तो न्यायालय उस आपत्तिजनक/मानहानिकारक सामग्री की प्रतियों को नष्ट करने का आदेश दे सकता है।
धारा 502 – अचल संपत्ति का कब्जा वापस दिलाने की शक्ति
यदि किसी व्यक्ति को बलपूर्वक या आपराधिक तरीके से अचल संपत्ति से बेदखल किया गया हो और अपराध सिद्ध हो जाए, तो न्यायालय वास्तविक मालिक या अधिकारधारी को पुनः कब्जा दिलाने का आदेश दे सकता है।
धारा 503 – पुलिस द्वारा संपत्ति जब्त किए जाने पर प्रक्रिया
जब पुलिस किसी संपत्ति को जब्त करती है, तो वह संबंधित मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना देगी। मजिस्ट्रेट उस संपत्ति के संरक्षण, सुपुर्दगी या निस्तारण के संबंध में उचित आदेश पारित करेगा।
धारा 504 – छह माह तक कोई दावेदार न आने पर प्रक्रिया
यदि जब्त संपत्ति पर छह माह तक कोई वैध दावा नहीं किया जाता, तो मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार उस संपत्ति के निस्तारण का आदेश दे सकता है।
धारा 505 – शीघ्र नष्ट होने वाली संपत्ति की बिक्री
यदि जब्त संपत्ति शीघ्र खराब होने वाली हो या उसके रख-रखाव का खर्च अधिक हो, तो मजिस्ट्रेट उसे बेचने का आदेश दे सकता है।
धारा 506 – ऐसी अनियमितताएँ जो कार्यवाही को अवैध नहीं बनातीं
कुछ प्रक्रियात्मक त्रुटियाँ, यदि उनसे किसी पक्ष को वास्तविक हानि नहीं हुई है, तो वे न्यायिक कार्यवाही को अमान्य नहीं बनातीं।
धारा 507 – ऐसी अनियमितताएँ जो कार्यवाही को अवैध बनाती हैं
यदि कोई मजिस्ट्रेट बिना वैधानिक अधिकार के कोई कार्य करता है, तो ऐसी कार्यवाही शून्य (Void) मानी जाएगी।
धारा 508 – गलत स्थान पर हुई कार्यवाही
यदि मुकदमा गलत क्षेत्राधिकार (Wrong Place) में चलाया गया हो, तो केवल इसी आधार पर कार्यवाही अमान्य नहीं होगी, जब तक कि इससे न्याय में विफलता (Failure of Justice) न हुई हो।
धारा 509 – धारा 183 या धारा 316 के प्रावधानों का पालन न होना
यदि धारा 183 या धारा 316 की प्रक्रिया का पूर्ण पालन नहीं हुआ है, तो केवल उसी कारण से कार्यवाही अवैध नहीं होगी, जब तक यह सिद्ध न हो कि इससे न्याय प्रभावित हुआ है।
धारा 510 – आरोप (Charge) का न बनाया जाना, अनुपस्थिति या त्रुटि का प्रभाव
यदि आरोप बनाने में चूक, आरोप का अभाव या उसमें त्रुटि हो, तो केवल इसी कारण से निर्णय निरस्त नहीं होगा, जब तक कि उससे अभियुक्त को वास्तविक अन्याय (Failure of Justice) न हुआ हो।
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