Contract hindi

  

, Lalman shukla versus Gouridutt 1913 Facts The nephew of respondent had strayed .he had sent his munim to locate his nephew .he had distributed in Kanpur with reward of rs.501 / for anyone who will locate his nephew .munim had found his nephew and he had known about this proposal after this incidents .he had filed a case to get this reward. Decision In this case proposal had not been communicated to the munim properly .he had not accepted this proposal . without knowledge of proposal no acceptance can be made . Convert into hindi

हिंदी अनुवाद

...जब तक कि अनुबंध (Contract) से विपरीत आशय (Contrary Intention) प्रकट न हो।

धारा 2(a) – प्रस्ताव (Proposal / Offer)

जब एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के प्रति कोई कार्य करने या कोई कार्य न करने (विरत रहने) की अपनी इच्छा इस उद्देश्य से व्यक्त करता है कि दूसरा व्यक्ति उस कार्य या विरत रहने के लिए अपनी स्वीकृति (Assent) दे, तब वह प्रस्ताव (Proposal/Offer) कहलाता है।

प्रस्ताव का संप्रेषण (Communication of Proposal)

सिद्धांत:
प्रस्ताव का संप्रेषण (Communication) होना आवश्यक है।

प्रमुख वाद (Landmark Case)

लालमन शुक्ला बनाम गौरी दत्त (1913)

तथ्य (Facts):

प्रतिवादी (Gouri Dutt) का भतीजा घर से लापता हो गया था। उसने अपने मुनीम लालमन शुक्ला को भतीजे की खोज करने के लिए भेजा। बाद में उसने कानपुर में यह घोषणा करवाई कि जो भी उसके भतीजे को खोजकर लाएगा, उसे ₹501 का इनाम दिया जाएगा।

मुनीम ने भतीजे को खोज लिया, लेकिन जब उसने उसे खोजा था, तब उसे ₹501 के इनाम की घोषणा की जानकारी नहीं थी। बाद में उसे इस प्रस्ताव का पता चला और उसने इनाम प्राप्त करने के लिए मुकदमा दायर किया।

निर्णय (Decision):

न्यायालय ने कहा कि प्रस्ताव का उचित संप्रेषण (Communication) मुनीम तक नहीं हुआ था। इसलिए उसने प्रस्ताव को जानते हुए स्वीकार (Acceptance) नहीं किया।

सिद्धांत:
प्रस्ताव की जानकारी (Knowledge of Proposal) के बिना कोई वैध स्वीकृति (Valid Acceptance) नहीं हो सकती। इसलिए मुनीम ₹501 के इनाम का हकदार नहीं था।




2. आर बनाम क्लार्क (R v. Clarke)

तथ्य (Facts):
एक व्यक्ति ने घोषणा की कि जो कोई भी वर्ष के पहले दिन डॉकयार्ड में 100 गज तैरकर पार करेगा, उसे पुरस्कार दिया जाएगा।

लेकिन यदि कोई व्यक्ति जहाज़ से गिर जाए और अपनी जान बचाने के लिए तैरकर किनारे पहुँचे, तो वह उस पुरस्कार का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि उसे उस पुरस्कार की घोषणा (प्रस्ताव) की जानकारी ही नहीं थी।

निर्णय (Decision):
न्यायालय ने निर्णय दिया कि प्रस्ताव (Offer) का उचित रूप से संप्रेषित (Communicated) होना आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति को प्रस्ताव की जानकारी ही नहीं है, तो वह उस प्रस्ताव के आधार पर पुरस्कार या अधिकार का दावा नहीं कर सकता।

सिद्धांत (Principle):
"प्रस्ताव का संप्रेषण (Communication of Proposal) आवश्यक है।"
यदि प्रस्ताव की जानकारी नहीं है, तो उसकी स्वीकृति (Acceptance) भी नहीं मानी जाएगी और कोई वैध अनुबंध (Valid Contract) नहीं बनेगा।


सामान्य प्रस्ताव (General Proposal)

वाद संख्या 1

कार्लिल बनाम कार्बोलिक स्मोक बॉल कम्पनी (1893)

तथ्य (Facts)

प्रतिवादी कम्पनी ने एक विज्ञापन प्रकाशित किया कि जो भी व्यक्ति इस दवा का उपयोग करेगा और उसके बाद भी उसे सर्दी या बुखार हो जाएगा, उसे कम्पनी द्वारा 100 पाउंड का इनाम दिया जाएगा।

कम्पनी ने अपने इस वादे की सत्यता सिद्ध करने के लिए रिलायंस बैंक में 1000 पाउंड जमा कर दिए।

वादी ने कम्पनी की दवा का उपयोग किया, फिर भी उसे बुखार हो गया। इसलिए वादी ने 100 पाउंड प्राप्त करने के लिए न्यायालय में वाद दायर किया।

न्यायालय का निर्णय (Decision of the Court)

यद्यपि यह सामान्य प्रस्ताव (General Offer) था, फिर भी कम्पनी ने बैंक में 1000 पाउंड जमा कर दिए थे। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि कम्पनी का वादा केवल खोखला आश्वासन (Hollow Commitment) था।

सिद्धांत (Principle)

  • प्रस्ताव जनता (Public) के लिए किया जा सकता है।
  • परन्तु पूरी जनता एक साथ अनुबंध नहीं कर सकती।
  • जो व्यक्ति उस प्रस्ताव को स्वीकार करके उसकी सभी शर्तों का पालन करता है, वही कम्पनी के साथ वैध अनुबंध (Valid Contract) कर सकता है।

एन्सन (Anson) के अनुसार

यह आवश्यक नहीं है कि प्रस्ताव किसी निश्चित व्यक्ति को ही किया जाए, परन्तु कोई भी अनुबंध तब तक नहीं बनता जब तक किसी निश्चित व्यक्ति द्वारा उस प्रस्ताव को स्वीकार न कर लिया जाए।


प्रस्ताव (Proposal) एवं आमंत्रण (Invitation to Treat)

प्रस्ताव (Proposal) और आमंत्रण (Invitation to Treat) दोनों अलग-अलग अवधारणाएँ हैं।

प्रस्ताव (Proposal)

जब प्रस्तावकर्ता (Proposer) अनुबंध करने की अपनी अंतिम एवं निश्चित इच्छा प्रकट करता है, तो उसे प्रस्ताव (Proposal) कहते हैं।

आमंत्रण (Invitation to Treat)

ऐसे विज्ञापन या कथन जिनका उद्देश्य केवल व्यापारिक बातचीत (Business Negotiation) प्रारम्भ करना हो, उन्हें Invitation to Treat कहा जाता है। यह प्रस्ताव नहीं होता।


प्रमुख वाद (Landmark Case)

हार्वे बनाम फेसी (Harvey v. Facey, 1893)

तथ्य (Facts)

वादी ने प्रतिवादी को तार (Telegram) भेजकर पूछा—

"क्या आप अपनी 'बम्पर हॉल पेन' नामक संपत्ति बेचेंगे?"

साथ ही उसने संपत्ति का न्यूनतम नकद मूल्य (Minimum Cash Price) बताने को कहा।

प्रतिवादी ने उत्तर दिया—

"बम्पर हॉल पेन की न्यूनतम नकद कीमत 900 पाउंड है।"

वादी ने तुरंत उत्तर दिया—

"हमने आपका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है।"

किन्तु प्रतिवादी ने 900 पाउंड में संपत्ति बेचने से इंकार कर दिया।

निर्णय (Decision)

न्यायालय ने कहा कि केवल न्यूनतम कीमत बताना प्रस्ताव (Offer) नहीं है, बल्कि यह केवल Invitation to Treat (प्रस्ताव देने का आमंत्रण) है। इसलिए कोई वैध अनुबंध नहीं बना।




2. मैकफर्सन बनाम अप्पन्ना (Macpherson v. Appanna)

तथ्य (Facts)

वादी (Plaintiff) ने प्रतिवादी (Respondent) का मकान ₹6,000 में खरीदने का प्रस्ताव (Proposal) दिया।

वादी ने प्रतिवादी के एजेंट से पूछा कि क्या उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है, अथवा यदि प्रतिवादी अधिक कीमत चाहता है तो वह अतिरिक्त राशि देने के लिए तैयार है।

प्रतिवादी ने उत्तर दिया कि वह कम से कम ₹10,000 में मकान बेचेगा।

वादी ने ₹10,000 देने के लिए सहमति व्यक्त कर दी, लेकिन बाद में प्रतिवादी ने मकान बेचने से इंकार कर दिया।

न्यायालय का निर्णय (Decision of the Court)

न्यायालय ने कहा कि ₹10,000 बताना केवल "प्रस्ताव देने का निमंत्रण (Invitation to Offer)" था, वास्तविक प्रस्ताव (Proposal) नहीं।

अतः केवल कीमत बताने से कोई वैध प्रस्ताव नहीं बनता और कोई अनुबंध (Contract) भी नहीं बनता।

Invitation to Offer (प्रस्ताव देने का निमंत्रण) के उदाहरण

  • बिक्री के लिए पुस्तकें (Books for Sale)
  • किराये के लिए मकान (House for Rent)
  • कैटलॉग (Catalogue)
  • निविदा/बोली की सूचना (Information of Bid)
  • रेलगाड़ी की समय-सारणी (Train Time Table)

B. प्रस्ताव की स्वीकृति (Acceptance of Proposal)

जब वह व्यक्ति, जिसके समक्ष प्रस्ताव किया गया है, उस प्रस्ताव के प्रति अपनी सहमति (Assent) व्यक्त करता है, तब उस प्रस्ताव को स्वीकृत (Accepted) कहा जाता है।

स्वीकृत प्रस्ताव (Accepted Proposal) ही वचन (Promise) बन जाता है।

  1.  चाहिए।



B. contract Cases Brogdan versus Metropolitan Railway company B without legal contract ,he continued to give coal to a Railway company .after some times a legal agreement had been written and sent to B .after some formalities B had sent to it to Railway company .the agent of company put this agreement in a drawer without give permission .he continued to give coal and get money .after some time dispute had been raised between both parties .B protested that he was not bound by contract .the act of company show that they wanted to enter into a contract . Important case Felthouse versus Bindlay Communication must be made to the proposer and his indicated person *****************"**** Offer /proposal must be created to establish legal relations Landmark case 1.Balfour versus Balfour1919 Defendant was doing job in Ceylon /shrilanka .he visited England with his wife and children .his wife had fallen ill there .before departure from England he promised that he will send 30 pond every months.he stopped to sent money after some months.divorce had been happened between them .wife had filed a suit against husband for remaining amount . Decision --in this case parties have no intention to create legal relation.the parties must keep to create legal relations before enter into a contract.these case depend on compromise between husband and wife ******* 2.JONES VERSUS PADVETON Convert into hindi

प्रस्ताव (Offer) की स्वीकृति (Acceptance)

B. जब वह व्यक्ति, जिसके समक्ष प्रस्ताव किया गया है, उस प्रस्ताव के प्रति अपनी स्वीकृति (Assent) व्यक्त कर देता है, तब उस प्रस्ताव को स्वीकृत (Accepted) कहा जाता है।

जब किसी प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है, तो वह "वचन (Promise)" बन जाता है।

प्रस्ताव की स्वीकृति (Acceptance of Proposal)

  1. स्वीकृति मौखिक (Oral), लिखित (Written) या आचरण (By Conduct/Act) द्वारा दी जा सकती है।

  2. अनुबंध (Contract) करने की मंशा (Intention) किसी न किसी साक्ष्य (Evidence) से स्पष्ट होनी चाहिए।


प्रमुख वाद (Case)

1. Brogden v. Metropolitan Railway Co.

तथ्य (Facts):

बी (B) बिना किसी विधिक अनुबंध (Legal Contract) के रेलवे कंपनी को कोयला आपूर्ति करता था। कुछ समय बाद एक लिखित अनुबंध तैयार किया गया और बी को भेजा गया। आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद बी ने उस पर हस्ताक्षर करके उसे रेलवे कंपनी को वापस भेज दिया।

रेलवे कंपनी के एजेंट ने उस अनुबंध को बिना औपचारिक स्वीकृति दिए अपनी दराज (Drawer) में रख दिया। इसके बाद भी कंपनी लगातार बी से कोयला लेती रही और उसका भुगतान करती रही।

कुछ समय बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ। बी ने कहा कि वह अनुबंध से बंधा हुआ नहीं है।

निर्णय (Decision):

न्यायालय ने कहा कि रेलवे कंपनी के आचरण (Conduct) से यह स्पष्ट था कि वह अनुबंध करना चाहती थी। इसलिए दोनों पक्षों के बीच वैध अनुबंध (Valid Contract) बन चुका था।


महत्वपूर्ण वाद (Important Case)

Felthouse v. Bindley

सिद्धांत (Principle):

प्रस्ताव की स्वीकृति (Acceptance) का संप्रेषण (Communication) प्रस्तावकर्ता (Proposer) या उसके द्वारा अधिकृत व्यक्ति (Authorized Person) को किया जाना आवश्यक है।

केवल मौन (Silence) को स्वीकृति नहीं माना जा सकता।


प्रस्ताव (Offer) का उद्देश्य

प्रस्ताव/ऑफर का उद्देश्य पक्षों के बीच वैधानिक संबंध (Legal Relations) स्थापित करना होना चाहिए।


Landmark Case

1. Balfour v. Balfour (1919)

तथ्य (Facts):

प्रतिवादी (पति) सीलोन (वर्तमान श्रीलंका) में नौकरी करता था। वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ इंग्लैंड आया। इंग्लैंड में उसकी पत्नी बीमार हो गई।

इंग्लैंड से वापस जाते समय पति ने पत्नी से वादा किया कि वह उसे प्रति माह 30 पाउंड भेजेगा। कुछ महीनों तक उसने पैसे भेजे, लेकिन बाद में भेजना बंद कर दिया।

इसके बाद पति-पत्नी का तलाक हो गया। पत्नी ने बकाया राशि की वसूली के लिए पति के विरुद्ध मुकदमा दायर किया।

निर्णय (Decision):

न्यायालय ने निर्णय दिया कि इस मामले में पक्षकारों का वैधानिक संबंध (Legal Relationship) स्थापित करने का कोई इरादा नहीं था।

पति-पत्नी के बीच इस प्रकार के घरेलू समझौते (Domestic Agreements) सामान्यतः कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally Enforceable) नहीं होते।


2. Jones v. Padavatton



2.JONES VERSUS PADVETON A Decision -both parties had to create legal relationship here .so this is not social contract . Translate into hindi

2. जोन्स बनाम पैडवेटन (Jones v. Padavatton)

तथ्य (Facts):
एक तलाकशुदा महिला अपने बच्चे के साथ वॉशिंगटन में रहती थी। उसकी माँ चाहती थी कि वह ट्रिनिडाड आकर उसके साथ रहे। माँ ने अपनी बेटी को वहाँ आने के लिए प्रेरित किया और वादा किया कि वह उसके रहने का घर तथा सभी खर्च उठाएगी। साथ ही माँ चाहती थी कि उसकी बेटी वहाँ से एल.एल.बी. (LL.B.) की पढ़ाई करे।

लेकिन बेटी पाँच वर्षों में एल.एल.बी. की डिग्री प्राप्त नहीं कर सकी। बाद में उसने दूसरे व्यक्ति से विवाह कर लिया। इसके बाद माँ और बेटी के संबंध खराब हो गए। माँ ने खर्च देना बंद कर दिया और बेटी को घर खाली कराने के लिए मुकदमा दायर कर दिया।

निर्णय (Decision):
न्यायालय ने कहा कि बेटी पाँच वर्षों में एल.एल.बी. की पढ़ाई पूरी नहीं कर सकी और उसने माँ की अपेक्षाओं का पालन नहीं किया। इस मामले में परिस्थितियाँ ऐसी थीं कि पक्षकारों का कानूनी संबंध (Legal Relationship) बनाने का इरादा माना गया। इसलिए यह केवल पारिवारिक या सामाजिक व्यवस्था नहीं थी, बल्कि कानूनी प्रभाव वाला अनुबंध (Contract) माना गया।


3. मेरिट बनाम मेरिट (Merritt v. Merritt)

तथ्य (Facts):
पति और पत्नी एक मकान के संयुक्त स्वामी (Joint Owners) थे। उस मकान पर बंधक (Mortgage) था। पति घर छोड़कर दूसरी महिला के साथ रहने लगा। पत्नी के अनुरोध पर पति ने एक लिखित दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए कि यदि पत्नी मकान का पूरा बंधक ऋण चुका देगी, तो वह मकान उसके नाम हस्तांतरित (Transfer) कर देगा।

निर्णय (Decision):
न्यायालय ने कहा कि इस मामले में पति और पत्नी का कानूनी संबंध स्थापित करने का स्पष्ट इरादा (Intention to Create Legal Relations) था। इसलिए यह केवल सामाजिक या पारिवारिक समझौता नहीं था, बल्कि वैध अनुबंध (Valid Contract) था।



Proposal+acceptance ----promise 2 c 2a +2 b---2 c ********************* 2C.the person making the proposal is called the promisor And the person accepting the proposal is called the promisee 2D.when at the desire of the promisor The promisee or any other person has done or abstained from doing Or does or abstains from doing Or promises to do or to abstain from doing Something such act or abstinence or promise Is called a consideration for the promise consideration had been defined by Polak and black stone .but accepted defination had been explained in Curie versus Misa by justice Lush . Consideration At desire of promisor Durga Prasad versus Baldev Plaintiff had build some shops at the order of collector .these shops had been got by some traders .they promised to give commission.but the traders did not give commission.plaintiff had filed the suit Decision---these shops had not been built at desire of respondent but on the orders of collector. Translate into hindi

धारा 2(c) – वचनदाता (Promisor) और वचनग्राही (Promisee)

प्रस्ताव + स्वीकृति = वचन (Promise)

धारा 2(a) + धारा 2(b) = धारा 2(c)


धारा 2(c)

जो व्यक्ति प्रस्ताव (Proposal) करता है, उसे वचनदाता (Promisor) कहा जाता है।

जो व्यक्ति उस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, उसे वचनग्राही (Promisee) कहा जाता है।


धारा 2(d) – प्रतिफल (Consideration)

वचनदाता (Promisor) की इच्छा (Desire) पर,

  • वचनग्राही (Promisee) या कोई अन्य व्यक्ति

  • कोई कार्य करता है या करने से विरत रहता है,

  • या कोई कार्य करता है या करने से विरत रहता है,

  • या कोई कार्य करने या न करने का वचन देता है,

तो ऐसा कार्य, कार्य से विरत रहना या उसका वचन, उस वचन (Promise) का प्रतिफल (Consideration) कहलाता है।


प्रतिफल (Consideration) की परिभाषा

प्रतिफल की परिभाषा Pollock तथा Blackstone ने भी दी थी, लेकिन न्यायालयों द्वारा सर्वाधिक स्वीकार की गई परिभाषा Curie v. Misa मामले में न्यायमूर्ति Lush ने दी।


प्रतिफल वचनदाता की इच्छा पर होना चाहिए

Durga Prasad v. Baldeo

तथ्य (Facts):

वादी (Plaintiff) ने कलेक्टर के आदेश पर कुछ दुकानें बनवाईं। उन दुकानों में कुछ व्यापारियों को दुकानें आवंटित की गईं। व्यापारियों ने वादी से वादा किया कि वे उसे कमीशन देंगे।

बाद में व्यापारियों ने कमीशन नहीं दिया। इसलिए वादी ने न्यायालय में वाद (Suit) दायर किया।

न्यायालय का निर्णय (Decision):

न्यायालय ने कहा कि दुकानें प्रतिवादी (Respondent) की इच्छा पर नहीं, बल्कि कलेक्टर के आदेश पर बनाई गई थीं। इसलिए यह प्रतिफल (Consideration) वचनदाता की इच्छा पर नहीं था, अतः व्यापारियों द्वारा किया गया वादा विधिसम्मत प्रतिफल पर आधारित नहीं था और वादी कमीशन प्राप्त करने का अधिकारी नहीं था।

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