AI AND JUDICIARY PART 3
AI AND JUDICIARY PART 3
21वीं सदी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता न्यायपालिका के लिए तकनीकी सहायता का प्रभावी माध्यम है। यह न्यायिक शोध, दस्तावेजों के विश्लेषण, अनुवाद तथा न्यायिक कार्यों के त्वरित निष्पादन में सहायक हो सकती है। तथापि, न्यायिक विवेक का स्थान कृत्रिम बुद्धिमत्ता नहीं ले सकती। पूजा रमेश सिंह बनाम जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड (2026) में सर्वोच्च न्यायालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न फर्जी अथवा काल्पनिक न्यायिक निर्णयों को बिना सत्यापन न्यायिक कार्यवाही में प्रस्तुत करने के प्रति कड़ा रुख अपनाया और ऐसे आचरण के प्रति शून्य-सहिष्णुता पर बल दिया। अतः कृत्रिम बुद्धिमत्ता न्याय का विकल्प नहीं, न्यायिक दक्षता का साधन है।
Comments
Post a Comment