Euthanasia part 3
भारत में इच्छामृत्यु के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय Gyan Kaur v. State of Punjab (1996) है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 में जीवन का अधिकार अपने आप “मरने का अधिकार” शामिल नहीं करता।
इसके बाद Aruna Ramachandra Shanbaug v. Union of India (2011) में सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ परिस्थितियों में निष्क्रिय इच्छामृत्यु को अनुमति देने का मार्ग प्रशस्त किया तथा जीवन रक्षक उपचार हटाने के लिए safeguards निर्धारित किए।
बाद में Common Cause v. Union of India (2018) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सम्मानपूर्वक मृत्यु का अधिकार (Right to Die with Dignity) अनुच्छेद 21 में निहित जीवन के अधिकार का हिस्सा है। न्यायालय ने सक्षम व्यक्ति को Advance Medical Directive (Living Will) बनाने की अनुमति भी दी।
अतः भारत में सक्रिय इच्छामृत्यु अभी भी निषिद्ध है, जबकि निर्धारित कानूनी safeguards के अधीन निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति है।
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