Contempt of court last part
निष्कर्षतः, न्यायालय की अवमानना न्यायपालिका की गरिमा, स्वतंत्रता एवं प्रतिष्ठा को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण साधन है। इसका मुख्य उद्देश्य न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना, न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होने से रोकना तथा न्याय प्रशासन में जनता का विश्वास बनाए रखना है। भारत में न्यायालय की अवमानना से संबंधित प्रावधान न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 129 और 215 में निहित हैं।
हालाँकि, अवमानना की शक्ति का प्रयोग न्यायपालिका की प्रतिष्ठा की रक्षा और न्याय प्रशासन के हित में किया जाना चाहिए, न कि न्यायपालिका की उचित एवं रचनात्मक आलोचना को दबाने के लिए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायालय की गरिमा के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। अतः कहा जा सकता है कि न्यायालय की अवमानना संबंधी कानून का वास्तविक उद्देश्य न्यायालय का व्यक्तिगत सम्मान सुरक्षित करना मात्र नहीं, बल्कि न्याय की निष्पक्षता, विधि के शासन तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका की प्रभावशीलता को सुनिश्चित करना है।
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