Contemt of court part 4
अवमानना न्यायालय का अर्थ न्यायालय के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करना अथवा न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न करना है। भारत में इसे अवमानना न्यायालय अधिनियम, 1971 द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इसकी धारा 2(ख) के अंतर्गत सिविल अवमानना तथा धारा 2(ग) के अंतर्गत आपराधिक अवमानना परिभाषित है। संविधान के अनुच्छेद 129 और 215 क्रमशः सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों को अपनी अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
प्रमुख निर्णय: E.M.S. Namboodiripad बनाम T.N. Nambiar (1970) में सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को कम करने वाले वक्तव्यों के संदर्भ में अवमानना के सिद्धांतों पर विचार किया। In Re: Arundhati Roy (2002) में न्यायालय ने न्यायिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को बनाए रखने के महत्त्व पर बल दिया।
अतः अवमानना कानून का उद्देश्य न्यायालय की गरिमा, न्यायिक आदेशों की प्रभावशीलता तथा न्याय प्रशासन में जनता के विश्वास की रक्षा करना है।
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