UCC PART 4
UCC PART 4
यह कानुन अनुच्छेद 44 किसी प्रकार अनु 25,26 ओर 27 के मुल अधिकारों का ना तो उल्लघंन करता है ना हि हनन करता है।मगर तीन तलाक़ ओर हवाला जैसी कुरुतियों को समाप्त कर एक शानदार पंरपरा की शुरूवात की गयी है।संविधान निर्माताओं का यह ख्वाब जल्दी ही साकार हो जायेगा।हमारे देश में गोवा के नागरीक समान नागरीको संहिता के साये में मानव जीवन की प्रगति का आह्वान ओर निर्माण कर रहे हैं जो अन्य राज्यों के लिए एक जीवंत उदाहरण है।
सरला मुद्गल बनाम भारत संघ (1995) में सर्वोच्च न्यायालय ने समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर बल दिया। शाह बानो प्रकरण (1985) तथा जॉन वल्लामट्टम बनाम भारत संघ (2003) में भी व्यक्तिगत कानूनों के संदर्भ में UCC की संवैधानिक प्रासंगिकता सामने आई।
अतः UCC केवल कानूनों की एकरूपता नहीं, बल्कि समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकीकरण की संवैधानिक भावना को साकार करने का माध्यम है।
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